वह कौन सा ज्ञान है जो इंद्रियों आदि की सहायता के बिना होता है
जो ज्ञान इन्द्रियों आदि की सहायता से नहीं मिलता, उसे ही परमार्थी/केवल ज्ञान कहा जाता है।
- केवल ज्ञान (Kevala Jnana): यह ज्ञान सम्पूर्ण, अनंत और सभी वस्तुओं के बारे में एक साथ सच और सच्चे रूप में ज्ञात होता है, बिना किसी इन्द्रिय-संवेदना, मन या पूर्वाग्रह के. इसे आत्मा की पूर्ण जागृति से प्राप्त किया जाता है और यह केवल धर्मबहिष्कृत (निर्विकल्प) स्थिति में संभव है.
- किन संहिताओं में कहा गया है: यह आधुनिक भाषाओं में “omniscience” के रूप में भी समझा जाता है और सामान्यतः तीर्थंकरों (जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों) द्वारा प्राप्त माना जाता है.
- दो परंपराओं के बीच मतभेद: दोनों Digambar और Shwetambar परंपराओं में यह ज्ञान वही है जिसे तीर्थंकरों ने प्राप्त किया है; दोनों इसे वास्तविक, निष्कलंक ज्ञान के रूप में मानते हैं. कुछ व्याख्याओं में इसे आत्म-प्रकाशित ज्ञान कहा गया है और इसे इन्द्रियों के दायरे से परे माना गया है.
- सार: केवल ज्ञान वह ज्ञान है जो शरीर, इन्द्रिय, मन या स्मृतिभ्रंश के बिना, केवल आत्मा की समष्टि-ज्ञान की स्थिति से मिलता है.
संक्षेप में: वह ज्ञान जो इन्द्रियों आदि की सहायता से नहीं होता, उसे केवल ज्ञान कहा जाता है—आत्मा का पूर्ण, निष्कलंक जागरण जिसका पहुँच केवल तीन स्थितियों से ऊपर है।