गुना के परिणमन को क्या कहते हैं
गुण-परिणमन (Guṇa-pariṇāma) का अर्थ जैन धर्म में यह है कि हर द्रव्य (पदार्थ) के गुण या स्वभाव उसकी वही मूल सत्ता के साथ रहते हैं, लेकिन समय-स्थिति के कारण उन गुणों में परिवर्तन हो जाते हैं। सरल शब्दों में: गुण द्रव्य के परिवर्तन-रूप हैं, और द्रव्य के रहते हुए ही गुण बदलते रहते हैं।
- द्रव्य और गुण के संबंध के बारे में कुछ व्याख्याओं में कहा गया है कि गुण द्रव्य से पृथक हैं, जबकि अन्य दृष्टिकोण में गुण द्रव्य के परिणाम (परिणामस्वरूप) हैं—यानी वे द्रव्य के परिणामी रूप हैं। इस प्रकार गुण-परिणमन का विचार उसी विचारधारा से जुड़ा है कि पदार्थ के स्वरूप में बदलाव होते रहते हैं, जबकि उसके मूल तत्व एक ही रहते हैं।
- Digambara और Śvetāmbara दोनों ही इस सिद्धांत को मानते हैं; दोनों परम्पराओं में गुण-परिणाम का मूल विचार समान है, भिन्नताओं के बावजूद यह मूल अर्थ नहीं बदलता।
यदि आप चाहें, मैं इस विषय पर अधिक सरल शब्दों में और उदाहरणों के साथ व्याख्या कर सकता हूँ।