शिवलिंग में पार्श्व प्रभु प्रगट हुए है वह तीर्थ
शिवलिंग में पार्श्व प्रभु प्रगट होने की कथा जैन धर्म में प्रसिद्ध है। यह कथा मुख्यतः राजस्थान के मेहरौली (दिल्ली) के पास स्थित "पार्श्वनाथ जिनालय" या "मंदिर श्री पार्श्वनाथ, मेहरौली" से संबंधित है। एक अन्य प्रसिद्ध तीर्थ "श्री शंखेश्वर तीर्थ" (गुजरात) से भी इस प्रकार की कथा जुड़ी है।
कथा का संक्षिप्त विवरण: प्राचीन काल में एक शिवलिंग के रूप में पूजित स्थल पर जैन साधुओं के तप और आराधना के प्रभाव से भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति प्रकट हुई थी। स्थानीय लोगों ने पहले वहाँ शिवलिंग की पूजा की, लेकिन बाद में पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा प्रकट होने से वह स्थान जैन तीर्थ बन गया।
प्रमुख स्थल:
- श्री पार्श्वनाथ जिनालय, मेहरौली (दिल्ली): यहाँ ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग में से भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा प्रकट हुई थी।
- श्री शंखेश्वर तीर्थ, गुजरात: यहाँ भी पार्श्वनाथ भगवान द्वारा प्रकट होने का उल्लेख मिलता है, किंतु शिवलिंग के संदर्भ में कथा मेहरौली से अधिक जुड़ी हुई है।
निष्कर्ष: शिवलिंग में से पार्श्व प्रभु के प्रकट होने का प्रमुख तीर्थ "श्री पार्श्वनाथ मंदिर, मेहरौली (दिल्ली)" माना जाता है। वहाँ आज भी पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिष्ठित प्रतिमा है और यह जैन श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है।