87000 वर्ष प्राचीन कौसग धारी शांतिनात प्रभु का तीर्थ
श्री शांतिनाथ भगवान, जो कि जैन धर्म के सोलहवें तीर्थंकर हैं, का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। जैन शास्त्रों के अनुसार, शांतिनाथ प्रभु का जन्म स्थल हस्तिनापुर (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत) में हुआ था। हस्तिनापुर को ही उनका प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। यह स्थान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है, जहाँ शांतिनाथ भगवान का जन्म, दीक्षा और केवलज्ञान कल्याणक मनाए जाते हैं।
"87000 वर्ष प्राचीन कौसग धारी" का अभिप्राय जैन धर्म में भगवान शांतिनाथ की काल गणना और तीर्थ स्थल की प्राचीनता से है। जैन ग्रंथों के अनुसार, तीर्थंकरों की आयु, कद (कौसग) और उनके काल की गणना बहुत विशाल (लाखों-करोड़ों वर्ष) होती है। शांतिनाथ भगवान की आयु साढ़े लाख (लाखों) वर्षों में बताई गई है और उनकी कद (कौसग) भी असाधारण था। कौसग माप की एक विशेष इकाई है, जो प्राचीन काल में शरीर की ऊँचाई को दर्शाने के लिए प्रयोग होती थी।
हस्तिनापुर तीर्थ के बारे में:
- यहाँ श्री शांतिनाथ भगवान का भव्य जिनालय (मंदिर) स्थित है।
- इस तीर्थ स्थान पर शांतिनाथ प्रभु के अलावा अन्य तीर्थंकरों के भी मंदिर हैं।
- यहाँ पर प्रतिवर्ष शांतिनाथ प्रभु के कल्याणकों का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
सारांश: 87000 वर्ष प्राचीन कौसग धारी शांतिनाथ प्रभु का तीर्थ "हस्तिनापुर" (उत्तर प्रदेश) है, जो जैन धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है और यहाँ जैन अनुयायी विशेष श्रद्धा के साथ दर्शन करने आते हैं।
यदि आपको तीर्थ के इतिहास, महत्व या वहाँ के दर्शन विधि आदि की और जानकारी चाहिए तो कृपया पूछें।