After panchamkaal what will start
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पञ्चामकाळ (पन्चाम काल) Jain धर्म में हर समुदाय के अनुसार अलग-अलग संदर्भों में आता है और हर संप्रदाय में इसका उपयोग अलग तरह से किया जा सकता है। इसी कारण “पञ्चामकाळ के बाद क्या शुरू होगा” ऐसा प्रश्न एक ही उत्तर नहीं देता; यह निर्भर करता है कि आप कौनसे वहीद या परंपरा (श्वेताम्बर/ Digambar) की बात कर रहे हैं और उस विशेष ऋतु/यज्ञ के समय-houseage क्या चल रहा है।
संभावित सामान्य प्रवृत्ति (परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है):
- कई स्थितियों में पञ्चामकाळ के बाद उस दिन की मुख्य साधना या व्रत–अनुष्ठान शुरू होता है, जैसे समायिक (ध्यान-समय), प्रात:प्राकृत (नियमित पूजन) या नमोन्न-आचार का पाठ।
- कुछ मामलों में Navakar मंन्त्र के पाठ, Pratिक्रमण (पाप-क्षण-स्वीकृति) आदि की शुरुआत भी पञ्चामकाळ के बाद होती है—पर यह सीधे-सीधे हर संप्रदाय के नियम पर निर्भर करता है।
कृपया यह स्पष्ट करें:
- आप किस संप्रदाय (श्वेतांबर/ द्विभाजन) या किस त्योहार/व्रत की बात कर रहे हैं?
- आप किन प्रकार की क्रिया के बारे में पूछ रहे हैं (दिन की पूजा, समायिक, प्राकृत-प्रारम्भ आदि)?