संयत किस को कहते हैं
जैन धर्म के अनुसार, "संयत" उस व्यक्ति को कहते हैं, जो इंद्रियों और मन पर संयम रखता है। संयत व्यक्ति अपनी इच्छाओं, क्रोध, मोह, लोभ आदि पर नियंत्रण करता है और अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह जैसे पंच महाव्रतों का पालन करता है। संयम ही मोक्ष मार्ग का प्रथम सोपान है। जैन साधु-साध्वियाँ सर्वोच्च संयम का पालन करते हैं, जबकि श्रावक-श्राविकाएँ आंशिक (अनुव्रत) संयम का पालन करते हैं।
संक्षेप में, जो व्यक्ति अपने मन, वचन और काया को धर्म के अनुसार नियंत्रित रखता है, उसे 'संयत' कहते हैं।