Shri mandar swami se prashansit pray shaswat jain tirth
श्री मंदार स्वामी द्वारा प्रशंसित "प्रायः शाश्वत जैन तीर्थ" का उल्लेख जैन धर्मग्रंथों में मिलता है। जैन परंपरा के अनुसार, 'शाश्वत तीर्थ' वे पवित्र स्थल हैं, जो प्रत्येक चौबीसी (चौबीस तीर्थंकरों के काल) में जैन तीर्थंकरों द्वारा पवित्र किए गए हैं और हमेशा तीर्थ के रूप में पूजे जाते हैं।
मंदारगिरि (मंदार पर्वत), बिहार में स्थित एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ है, जिसे मंदार स्वामी (भगवान वासुपूज्य, 12वें तीर्थंकर) की तपोभूमि के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ वासुपूज्य स्वामी ने तपस्या की थी और इस स्थल की महिमा का वर्णन स्वयं मंदार स्वामी ने भी किया है।
कुछ प्रमुख शाश्वत जैन तीर्थ (प्रायः 'अष्ट शाश्वत' कहे जाते हैं) निम्नलिखित हैं:
- सम्मेद शिखरजी (झारखंड)
- श्री शांतिनाथजी का जन्म स्थल (चम्पापुरी, बिहार)
- गिरनार (गुजरात)
- पावापुरी (बिहार)
- शत्रुंजय (पालिताणा, गुजरात)
- अष्टापद (हिमालय क्षेत्र)
- मंदारगिरि (बिहार)
- राजगृही (राजगीर, बिहार)
इन तीर्थों का विशेष महत्त्व जैन धर्म में है और इन्हें बार-बार तीर्थंकरों की उपस्थिति, तपस्या या मोक्षस्थली के रूप में माना गया है। मंदारगिरि भी इन्हीं शाश्वत तीर्थों में स्थान रखता है और श्री मंदार स्वामी द्वारा इसकी विशेष प्रशंसा की गई है।
यदि आपको किसी विशेष तीर्थ या मंदारगिरि के बारे में विस्तार से जानना है, तो कृपया बताएं।