भक्तामर स्तोत्र श्लोक पहिला, प्राकृत अर्धमागधी मधे लिहून दे, हिंदी अर्थासहीत
भक्तामर स्तोत्र का प्रथम श्लोक (Prakrit/ Ardhamagadhi पाठन) और हिंदी अर्थ:
अर्द्धमागधी प्राकृत पाठ (पहला श्लोक): Bhaktamar-pranat-mauli-manī-prabhāṇā mudyotako dalita-pāp-tamo-vitānām, samyak-pranamya jina-pad-yugam yugādā-vālaṁbanam bhava-jalē patatām janānām.
हिंदी अर्थ: हे आदिनाथ के प्रति समर्पित भक्तों के स्तवन में प्रकट मुख से प्रणत, विनय और भक्ति की गाथा का संकेत करता है—हमारे पापों के अंधकार को दूर करने वाले, पवित्र गुरु के चरणों में मनुहार कर प्रणाम करते हैं। सही भक्ति में जिंपाद-युग (जिन-पद) कीर्ति को धारण करके भवसमुद्र में डूबते लोगों के लिए रौशनी और मार्गदर्शन मिलना संभव है।
ध्यान दें:
- भक्तामर स्तोत्र Digambar परंपरा में 48 श्लोकों का माना गया है, जबकि Śvetāmbara परंपरा में 44 श्लोक माने जाते हैं। इस श्लोक-क्रम में पंक्तियाँ एक ही मूलभाव को दिखाती हैं, पर संख्या और कुछ पाठ्य-भाग दोनों पर मतभेद चलते हैं।
- ऊपर दिया गया Ardhamagadhi पाठ Digambara/Śvetāmbara पाठों के मुख्य तत्त्वों को समाहित करने की कोशिश है; राजस्थानी-ऊपर्युक्त संस्करणों में स्वर और कंठ-प्रयोग में विविधताएँ पाई जाती हैं।
अगर आप चाहें तो मैं इस श्लोक के लिए Digambara और Śvetāmbara दोनों परंपराओं के स्पष्ट पाठ (देवनागरी/लिप्यंतरण) और उनके छोटे-छोटे भेदों के साथ दे दूँ, साथ ही किसी एक द्वैत-भाष्य के अनुसार हिंदी टीका भी दे सकता हूँ.