nandishwAr jain vrat mantra
Nandiśvara vrat (Ashtāḥnika vrata) ke japya-mantra ka sārwan text yeh hai. Neeche diye gaye 8 pāṭh shuddh Jain śāstrik pāṭhāvalī se liye jaate hain aur Nandiśvara ki puja se judi vrat ke liye prayukt hote hain.
Japya-mantra (Nandiśvara vrata): 1) ओं ह्रीं नंदीश्वरसंज्ञाय नमः | 2) ओं ह्रीं अष्टमहाविभूतिसंज्ञाय नमः | 3) ओं ह्रीं त्रिलोकसारसंज्ञाय नमः | 4) ओं ह्रीं चतुर्मुखसंज्ञाय नमः | 5) ओं ह्रीं पंच-महालक्षण-संज्ञाय नमः | 6) ओं ह्रीं स्वर्गसोपान-संज्ञाय नमः | 7) ओं ह्रीं श्री सिद्धचक्राय नमः | 8) ओं ह्रीं इन्द्रध्वज-संज्ञाय नमः |
इनमें हर एक पंक्ति Nandiśvara के विभिन्न गुण, देव-चिन्ह और महत्त्व को समर्पित है। इनका सामान्य अर्थ यह है:
- हर पंक्ति में नमस्कार के साथ Nandiśvara के महत्त्वपूर्ण नामा-गुणों का स्मरण किया जाता है, ताकि vrat ke prabhaav se श्रद्धा, शुद्धि और आत्म-संयम बढ़े।
- यह जाप, श्रद्धा और आचार-आचरण की शुद्धता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि अस्थिर कामनाओं से मन शांत हो और मोक्ष-मार्ग स्पष्ट हो।
ध्यान दें:
- Nandiśvara vrat के यह japya-mantra Digambar और Śvetāmbar दोनों परम्पराओं में मान्यता प्राप्त हैं; इस खास मंत्र-संयोजन में बड़े अंतर की जानकारी साधारण तौर पर उपलब्ध नहीं है, और आम तौर पर दोनों संप्रदाय इसे स्वीकारते हैं।
- यदि आपके खास मठ/आचार्य की कोई अलग पाठ-प्रथा हो, तो वहाँ दिए गए पाठ के अनुसार ही जाप करें।
अगर चाहें, मैं इस vrat से जुड़ी अन्य सरल अभ्यास-प्रकिया (जैसे Pachchakkhāna,-ekāśana आदि) की भी संक्षिप्त व्याख्या दे सकता हूँ।