क्या पालीताणा के मुख्य मंदिर या मूलनायक प्रतिमा किसी दोशी परिवार द्वारा स्थापित किए गए हैं?
संक्षेप में उत्तर: Palitana के शत्रुंजय पहाड़ी पर बने जैन तीर्थों के मुख्य मन्दिर (Taleti से शिखर तक) को एक खास “दोशी परिवार” द्वारा स्थापित नहीं माना जाता। इन मन्दिरों का निर्माण और विस्तार विभिन्न वर्षों में अनेक जैन व्यापारी/समुदायों ने किया है, और कोई एक-के-लिए मुख्य संस्थापक दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से नहीं बताता कि Doshi (दोशी) परिवार ने मूल प्रतिमा या मुख्य मंदिर की स्थापना की हो। मुख्य प्रतिमा और तीर्थ-समूह का प्रमुख आकर्षण Adinath/Rishabhanath (Adeshwar) मंदिर है, जो प्राचीन समय से स्थापित मान्यताप्राप्त mulnayak माना गया है। ( jainknowledge.com)
देश-भर के जैन समुदाय में Palitana के शत्रुंजय तीर्थ को कई वर्षों के विविध सहयोग और दान से विकसित किया गया है; Shwetambar मूरत pujako के लिए यह स्थल स्वर्गीय माना गया है, वहीं Digambar समुदाय की मौजूदगी भी है, किन्तु मुख्य की प्रतिष्ठित मूर्ति/मंदिर की स्थापना किसी एक “दोशी” परिवार द्वारा निर्धारित नहीं पाई जाती। विभिन्न भागों के इतिहास और परंपरा में प्रवेश-करने वाले अनेक patrons और संस्थाओं का उल्लेख मिलता है, पर Doshi परिवार को मुख्य संस्थापक-स्रोत के रूप में ठहराने वाला विश्वसनीय Jain-सं scr पन्ने स्पष्ट नहीं दिखाते। इस विषय पर अधिक विवरण नीचे दिए JainKnowledge के पन्नों में मिल सकता है:
- Palitana के पवित्र तीर्थ के बारे में समेकित सार: Palitana sacred क्यों है और इसकी धारणा Digambar–Śvetāmbara के भीतर कैसे भिन्न है.
यदि आप चाहें, मैं इन स्रोतों से विशेष उद्धरणों/पंक्तियों के साथ और स्पष्ट कर सकता/सकती हूँ कि मुख्य प्रतिमा कौन-सी है, किस दौर में किसने उसका प्रतिष्ठान किया, और Digambar बनाम Śvetāmbara दृष्टिकोण के अनुसार उनमें क्या अंतर माना गया है।