Prabhu pratishtha k samay grbh grah me jis Prabhu ka nam likha jata h unka tirth
प्रभु प्रतिष्ठा के समय गर्भगृह में जिन प्रभु का नाम लिखा जाता है, उनके तीर्थ का उल्लेख भी किया जाता है। परंपरानुसार, यह जानकारी शिलालेख (शासन लेख) या ताम्रपत्र आदि पर अंकित की जाती है।
उदाहरण के लिए, यदि गर्भगृह में श्री आदिनाथ भगवान (ऋषभदेव) की प्रतिष्ठा हो रही है, तो उनके तीर्थ – ‘अयोध्या’ लिखा जाएगा। इसी प्रकार:
- श्री नेमिनाथ भगवान – गिरनार
- श्री पार्श्वनाथ भगवान – पारसनाथ (समेत शिखरजी)
- श्री महावीर स्वामी – क्षत्रियकुंड (वैशाली के पास, बिहार)
अर्थात्, जिस जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिष्ठा हो रही है, उनके निर्वाण या जन्म/तपस्थली के तीर्थ का नाम लिखा जाता है। यह परंपरा जैन शास्त्रों एवं विधान में उल्लिखित है, जिससे भविष्य में भी उस प्रतिष्ठित प्रतिमा या जिनालय की सही पहचान बनी रहे।