Mahavidya me kon se sidh nahi hote hai
जैन धर्म के अनुसार, महाविद्या (महाविद्याएँ) विशेष शक्तियाँ या विद्याएँ होती हैं, जिनका उल्लेख शास्त्रों में मिलता है। महाविद्याएँ साधारणतः तांत्रिक या चमत्कारी शक्तियों के लिए जानी जाती हैं। “सिद्ध” शब्द जैन धर्म में आमतौर पर उन आत्माओं के लिए प्रयुक्त होता है जिन्होंने मोक्ष प्राप्त कर लिया है, यानी वे जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो गई हैं।
महाविद्याओं का संबंध संसारिक चमत्कारों या विशेष कार्यों से होता है, जबकि "सिद्ध" आत्माएँ संसारिक कार्यों या चमत्कारों में लिप्त नहीं होतीं। वे केवल मोक्ष की स्थिति में स्थित रहती हैं और उनका संसारिक विषयों से कोई संबंध नहीं होता।
इसलिए, महाविद्याओं में सिद्ध नहीं होते हैं। सिद्धगण मोक्ष में स्थित शुद्ध आत्माएँ हैं, जबकि महाविद्या संसारिक कार्यों और साधनाओं के लिए प्रयुक्त होती है।
सारांश: महाविद्याओं में सिद्ध नहीं होते; सिद्ध आत्माएँ मोक्ष में स्थित रहती हैं और संसारिक विद्याओं या चमत्कारों में उनकी कोई भूमिका नहीं होती।