Updeshmala granth ki gatha se kisko bodh hua
Updeshmala (उपदेशमाला) एक प्रसिद्ध जैन ग्रंथ है, जिसे आचार्य धर्मदास गणि ने लिखा था। इसमें कुल 108 गाथाएँ (श्लोक) हैं, जिनके माध्यम से आत्मा की शुद्धि, सम्यक्दर्शन, सम्यक्चरित्र, अहिंसा, सत्य, आदि जैन सिद्धांतों का उपदेश दिया गया है।
आपके प्रश्न अनुसार, "Updeshmala granth ki gatha se kisko bodh hua" — इसका अर्थ है कि उपदेशमाला की गाथाओं से किसे बोध (ज्ञान या जागृति) हुई।
जैन परंपरा के अनुसार, उपदेशमाला की प्रत्येक गाथा एक साधक, श्रावक या मुमुक्षु के लिए है, जो मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहता है। इन गाथाओं का अध्ययन और मनन करने से साधकों को सम्यक्दर्शन, सम्यक्ज्ञान, और सम्यक्चरित्र का बोध होता है। विशेष रूप से, किसी एक व्यक्ति का उल्लेख नहीं है कि उसे ही बोध हुआ, बल्कि यह सभी जिज्ञासु साधकों के लिए है, जिनमें भव्य जीव (मोक्ष की योग्यता रखने वाले जीव) इन उपदेशों से बोध पाते हैं।
संक्षिप्त उत्तर: उपदेशमाला की गाथाओं से समस्त जिज्ञासु साधकों को बोध (आत्मिक जागृति) होती है, जो मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहते हैं।
यदि आपको किसी विशेष गाथा या संदर्भ के बारे में जानकारी चाहिए, कृपया स्पष्ट करें।