संघ पूजा के लिए क्या बोलना चाहिए
संघ पूजा (जैन सामूहिक वंदन/भक्ति) के लिए आम तौर पर नीचे के ढांचे को अपनाते हैं. आप इसे अपने संप्रदाय (श्वेताम्बर/ digambar) के अनुसार थोड़ा-मोढ़कर कर सकते हैं। नीचे सरल और मौलिक रूप दिया गया है।
1) उद्घाटन अभिवादन
- जय जिनेन्द्र, जय महावीर आदि के शब्दों से पूजा की शुरुआत करें।
- गुरुदेव, साधु-संत और समुदाय के सभी सदस्य के प्रति प्रणाम व्यक्त करें।
2) Navkar (नवकार) मंत्र का अभ्यास
- यह जैन धर्म में सबसे प्रमुख प्रार्थना मानी जाती है और संघ-पूजा में सामान्यतः पाठ किया जाता है.
- एक सामान्य रूप ( Digambar / Śvetāmbara दोनों में प्रचलित) नीचे दिया गया है, आप अपने समुदाय की प्रथानुसार थोड़ा-बहुत बदल सकते हैं:
3) गुरुवर्य-भक्ति व शांतिपाठ
- गुरु-गंभीर की प्रार्थना: “गुरुभ्यो नमः” या संस्था के अनुसार निर्धारित मंत्र
- साधुओं के प्रति श्रद्धा-आह्वान
- सामूहिक शांत-ध्यान/वंदना (1–2 मिनट)
4) संकल्प और पवित्र भाव
- सभी सदस्य पाठ को निभाने का संकल्प लें: अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य आदि के पालन का संकल्प।
- सामूहिक सात्विकता और चित्त की एकाग्रता का पाठ करें।
5) समाप्ति
- “नमो आर्यान्ताणं” या अन्य समापन मंत्रों के साथ आशीर्वाद-उच्चारण, और प्रसाद/सामाजिक भोजन की तैयारी का संकल्प।
याद रखने योग्य बातें
- Digambara और Śvetāmbara में पाठ के शब्दों और क्रम में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं; अपने समूह की प्राचीन धारा के अनुसार पाठ संपादित करें।
- नवकार मंत्र प्रमुख है, पर कुछ समूह मामूली भिन्नताएं या अतिरिक्त स्तोत्र भी पढ़ते हैं (जैसे आराधना-स्तोत्र, गुण-गान आदि)।
- पूजा का उद्देश्य स्पष्ट विनम्रता, श्रद्धा और आत्म-निर्भर जीवन की प्रेरणा है।
अगर आप चाहें, मैं आपके खास संप्रदाय (Digambar/Śvetāmbara) के अनुसार पूरीathu पाठ‑सूची और उच्चारण साफ-साफ दे सकता हूँ—बस बताइए कौन सा संप्रदाय है और पूजा कौन से अवसर के लिए है (हरि-जयन्ती, सभापति-समारोह आदि)।