दिगम्बर संप्रदाय के उप संप्रदाय की जानकारी
दिगम्बर संप्रदाय के प्रमुख उप-संप्रदाय (Sub-sects) और उनके मुख्य गुण
- Bisapantha (20-panthi): यह सबसे पुरानी, विस्तार से मंदिर-आर्तन-पूजा और भाव-भक्ति को मानने वाला उप-संप्रदाय माना जाता है. Bhattarakas (धर्म-गुरु/मठाध्यक्ष) पर अधिक भरोसा रखते हैं और मूर्तिपूजा, प्रतिमा-पूजा आदि पर अधिक नियंत्रण रखते हैं. अन्य नामों में Segúnस्थानीय पंथ भी शामिल रहते हैं। arth व व्यवहार में मूर्तिपूजा और मंदिर-आधारित रीति-रिवाज प्रमुख हैं। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।
- Terapantha (13-panthi): 17वीं सदी के आसपास Bisapantha के भीतर उभरने वाला सुधार-आधारित उप-संप्रदाय. Bhattaraka-प्रभाव कम करने और पूजा-रीतियों को सरल बनाने पर बल देता है; मूर्तिपूजा या फूल-प्र blocs में बहुत कम रंग-राग माना जाता है, कुछ स्थानों पर भिन्न-भिन्न रीति-रिवाज भी सीमित रहते हैं. उद्देश्य है साधना-निर्मलता और साफ़-साफ़ उपासना-नीति।
- Taranapantha / Samaiyapantha (Taran Panth): ग्रंथ-आधारित पथ पर बल देता है; मूर्तिपूजा पर कुछ स्थानों पर कम निर्भर रहता है और Sacred texts (शास्त्रों) की अध्ययन-उपासना को प्रमुख माना जाता है.
- Gumanapantha, Totapantha आदि (छोटे उप-संप्रदाय): कुछ क्षेत्रों में छोटे-छोटे विभाजन या विशिष्ट रीति-रिवाजों के कारण बने, पर ये मुख्य तीन बड़े प्रवाह नहीं माने जाते; व्यवहार में उनके अभ्यास में क्षेत्रीय विविधताएं मिलती हैं।
नोट:
- Digambar में इन उप-संप्रदायों का मुख्य फर्क पूर्वाधिकार (Bhattaraka) के प्रति रुख, मूर्तिपूजा के स्तर, और धर्म-गुरुओं के अधिकार-प्रचार में रहा है.
- Digambar के इन उप-संप्रदायों की परख-नाुर्म और अभ्यास-रूप समय-समय पर बदला है; मूल विचार एक ही है: मोक्ष की दिशा में अहिंसा, सत्य और साधना।