अनुव्रत dhari kitano daya ka palan karte he
हाँ, अनुव्रतधारी (जो गृहस्थ अनुयायी जैन हैं) दया का पालन करते हैं। जैन धर्म में अहिंसा (अहिंसा परमोधर्मः) सबसे महत्वपूर्ण व्रत है। अनुव्रतों में अहिंसा अनुव्रत का पालन करते हुए गृहस्थ को जितना संभव हो, सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और मैत्रीभाव रखना चाहिए।
यद्यपि मुनि महाव्रत (पूर्ण अहिंसा) का पालन करते हैं, गृहस्थों के लिए अनुव्रत में — जान-बूझकर किसी भी सजीव प्राणी (कीट, पतंग, छोटे जीव आदि) को हानि नहीं पहुँचाने का संकल्प लिया जाता है। यदि अनजाने में भी कोई हानि हो जाए, तो उसके लिए प्रायश्चित (पश्चाताप) भी किया जाता है।
इस प्रकार, अनुव्रतधारी जैन जितना संभव हो, सभी जीवों—यहाँ तक कि कीटों—के प्रति भी दया का पालन करते हैं।