श्वेतांबर के अनुसर मंदिर में चढ़ गई पदार्ट (नारियाल) को पैसे देकर करिद के घर पर उपयाेग कर सकते हैं
संक्षेप में जवाब: श्वेतांबर (श्वेतांबर) जैन परंपरा में मंदिर में चढ़ाया गया पदार्त/प्रसाद भक्तों के लिए माना जाता है और सामान्यतः उसे घर लाकर खाया या परिवार में बाँटा जा सकता है। इसे पैसे देकर खरीदकर घर ले जाना भी ठीक माना जा सकता है, क्योंकि वह प्रसाद के रूप में पवित्र हो चुका होता है। بالطبع, इसका उद्देश्य प्रसाद के रूप में ही है, न कि बेचना या व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करना।
कुछ बिंदु स्पष्ट रखें:
- प्रसाद जो मंदिर में चढ़ाया गया है, उसे गृहस्थी में सम्मान के साथ लेना और परिवार के साथ बाँटना उचित है।
- यदि कोई वस्तु विशेष रूप से प्रसाद के रूप में निर्धारित नहीं है या उसे आप छोड़ना/फेंकना नहीं चाहते, तो उसे दान कर देना या कई लोगों में बाँटना अच्छे मान्य मान्यताओं के अनुसार ठीक रहता है।
- दिगंबर बनाम श्वेतांबर के बीच कुछ मामूली विवेकांतर हो सकते हैं, पर सामान्यत: प्रसाद लेने/खाने के लिए यह मान्य सामान्य नियम है।
यदि आपको किसी विशिष्ट सन्त या मंदिर की नीति के बारे में पूछना है, तो अपने गुरु/आचार्य से वही स्थल-विशिष्ट निर्देश लेना बेहतर रहेगा।