अनुव्रत dhari kitani daya ka palan karte he
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अनुव्रती (अनुव्रत धारी) जैन धर्म के अनुयायी होते हैं जो गृहस्थ (गृहस्थाश्रम) जीवन में रहते हुए पाँच मुख्य व्रतों (महाव्रतों) का सीमित पालन करते हैं। इन पाँच व्रतों में पहला व्रत है—अहिंसा (दया)।
अनुव्रती अहिंसा व्रत का पालन इस प्रकार करते हैं:
- वे किसी भी जीव की जानबूझकर हिंसा नहीं करते।
- वे यथासंभव सभी प्राणियों के प्रति दया, करुणा और सहानुभूति रखते हैं।
- वे मांस, अंडा, शहद आदि का सेवन नहीं करते।
- वे जल, अग्नि, पेड़-पौधों आदि में भी जीवन मानते हैं और अनावश्यक हानि से बचते हैं।
- वे अपने व्यवसाय, आहार, व्यवहार आदि में अहिंसा का ध्यान रखते हैं, यद्यपि पूर्ण संयम (जैसा कि साधु-साध्वी रखते हैं) नहीं रख पाते।
इस प्रकार, अनुव्रती अहिंसा/दया का यथासंभव पालन करते हैं, लेकिन उनके व्रत संयमित और सीमित होते हैं, जबकि साधु-साध्वी महाव्रत (पूर्ण व्रत) का पालन करते हैं।