Drivya shetra Kaal bhaav
नीचे सरल शब्दों में समझाया गया है:
- Dravya (द्रव्य): वह वास्तविक Substance या पदार्थ जो अस्तित्व में रहते हैं. जैन दर्शन में जीवन संस्थान (जiva) और पदार्थ (पुद्गल) आदि सब द्रव्य माने जाते हैं. द्रव्य वह चीज़ है जो अपने आप में स्थिर रहती है और परिवर्तन के साथ जुड़कर संसार बनाती है.
- Kaal (काल): समय की एक मूल सत्ता है. काल के बिना किसी पदार्थ की उत्पत्ति-नाश और चक्र परिवर्तन संभव नहीं, हर क्रिया-प्रक्रिया एक समय के साथ जुड़ी होती है.
- Bhaav (भाव): आत्मा के मानसिक अवस्था/भावनात्मक स्थिति या अनुभूति का स्वरूप. इसका मतलब है आत्मा कैसे अनुभव करता है, किस प्रकार की कामना या क्लेश उसके कर्तव्य-कारण बनते हैं. भाव karmic bondage पर प्रभाव डालते हैं और जीवन के अनुभवों को संचालित करते हैं.
नोट:
- Jain philosophy में इन तीनों के साथ अन्य तत्व (जैसे Jiva, Pudgala, Kshetra, Aakash आदि) मिलकर सात tattva बनाते हैं. Dravya, Kala, Bhaav अलग-अलग प्रकार के tattva/स्थितियाँ हैं जिनसे संसार और karmic प्रक्रिया समझाई जाती है.
- Digambar और Shwetambar में इन tattvo के सामान्य अर्थ में कोई मूलभूत भिन्नता नहीं होती, पर कुछ स्थानों पर शब्दार्थ/अनुवाद में छोटा-सा भेद हो सकता है। अगर आप किसी खास सूत्र या पाठ का संदर्भ चाहते हैं, बताइए तो परिशुद्ध अर्थ पुष्ट कर दूँगा।
अगर आप किसी विशेष sutra/stotra या पाठ का शास्त्रसर्वग जानकारी चाहते हैं, बताइए मैं उसी के अनुसार स्पष्ट अर्थ और मूल पाठ दे दूँगा।