" जो पुदगल है वो जड़ नहीं, जो जड़ है वो पुदगल नहीं ?? बताओ क्या" ??
संक्षेप में जवाब: पुद्गल (पुद्गल) वास्तव में जड़ है, और जिव (आत्मा) जड़ नहीं है. पर पुद्गल एक पृथक dravya है जो जीव से अलग है, और जड़/चेतना (सजीव-चेतन) से भी अलग है.
स्पष्ट समझ के लिए:
- जिव (आत्मा): चेतन तत्व है, जो जीवित अनुभव करता है—कर्म, बंधन, मोक्ष आदि से प्रभावित होता है.
- पुद्गल (म Matter): अचेतन तत्व है, जो स्पंदन नहीं करता, लेकिन गुणों के रूप में रंग-गंध-ताप आदि रखता है और कर्म को धारण करने में भूमिका निभाता है.
- धर्म/अधर्म, आकाश, काल: ये छह dravya (सत्य, पदार्थ) भी क्वालिटी/दृष्टांत देते हैं; pudgal इन्हीं के भीतर एक अलग पदार्थ है.
जहाँ तक कथन “जो पुदगल है वो जड़ नहीं, जो जड़ है वो पुदगल नहीं” का सवाल है:
- सही तरीका यही है कि जिव और पुद्गल एक-दूसरे से पृथक हैं: जिव चेतन है, पुद्गल अचेतन है—उन्हें एक ही मानना उचित नहीं है.
- यह कथन अगर पंचांग के रूप में दिया गया हो, तो उसका उद्देश्य ये दिखाना हो सकता है कि हर पदार्थ की पहचान अलग है और गुण/स्थिति में भिन्नता है. पर सामान्य Jain-साक्ष्यों में यह साफ है कि पुद्गल और जिव अलग dravya (पदार्थ) हैं, और जड़/पुद्गल की ऐसी ही वर्गीकरण है.
अगर आप चाहें, मैं इससे जुड़ी शास्त्रीय शब्दावली या संहिताओं से संबद्ध सरल Arth (अर्थ) भी दे दूँ—बस बताइए.