दूसरी ढाल से है
यह वाक्य अलग-अलग पाठों या सुत्रों में संदर्भ के अनुसार अर्थ बदल सकता है। कृपया बताएं कि आप किस पाठ/शास्त्र (उदा. किसी खास जैन ग्रंथ, स्तोत्र या चक्र से) की बात कर रहे हैं, ताकि मैं सही अर्थ (arth) देकर पूरा स्पष्टीकरण दे सकूं। अगर आप चाहें तो मैं मूल पाठ के साथ अर्थ भी दे दूँगा और Digambar/Shwetambar पर फर्क भी स्पष्ट कर दूँगा।