जैन धर्म के अनुसार देवो कि लिफ्ट क्या है
जैन धर्म के अनुसार "देवों की लिफ्ट" शब्द सामान्यतः जैन साहित्य या शास्त्रों में प्रत्यक्ष रूप से उल्लेखित नहीं है। परंतु, यदि आपके प्रश्न का आशय यह है कि देवों (स्वर्गों में रहने वाले जीवों) के ऊपर-नीचे जाने (आवागमन) की प्रक्रिया क्या है, तो जैन दर्शन के अनुसार, देवों का स्थानांतरण (उत्पत्ति या पतन) उनके कर्मों के अनुसार होता है।
जैन धर्म में चार गति मानी गई हैं: देव (स्वर्ग), मनुष्य, तिर्यंच (पशु-पक्षी आदि), और नारक (नरक)। जीव पूर्व जन्म के कर्मों के फलस्वरूप देव गति में उत्पन्न होते हैं। देवों का स्वर्ग में जाना या वहाँ से अन्य गति में आना, यह सब उनके कर्मों के बंध और निर्जरा (क्षय) के अनुसार होता है। इसमें कोई भौतिक 'लिफ्ट' जैसी व्यवस्था नहीं होती, बल्कि यह आत्मा की गति और उसके कर्मों के अनुसार होता है।
यदि आपके प्रश्न का कोई और विशेष संदर्भ है, तो कृपया स्पष्ट करें। यदि यह "लिफ्ट" शब्द किसी जैन मंदिर में देव-दर्शन हेतु बनाई गई आधुनिक सुविधा की ओर इशारा करता है, तो यह परंपरागत जैन धर्म का भाग नहीं, बल्कि आधुनिकता की सुविधा है, जिसका धार्मिक सिद्धांतों से सीधा संबंध नहीं है।
सारांश: देवों के ऊपर-नीचे आने-जाने की कोई 'लिफ्ट' जैसी व्यवस्था जैन शास्त्रों में नहीं है; सब कुछ कर्मों के अनुसार होता है।