Nirguan tapeshya kareen purr, uttam jagat gamy mar chalaanam,deepo pragat mati gyan prakashpradeep karoshi,
यह वाक्य एक श्रीमंत्र-जैसा प्रार्थना है जिसमें आत्म-शुद्धि और जगत-सुख की दो मुख्य बातें कही गई हैं.
- nirguan tapeshya kareen pur: यहाँ निर्ग्रंथ, निराकार तपस्या करने की बात है—यानी भौतिक पदार्थों या आकार-प्रकार से मुक्त होकर आत्म-सुधार, विनम्रता, और आत्म-चिंतन से मैले-कचैले कर्मों से मुक्त होना.
- uttam jagat gamy mar chalaanam: इसका मतलब है कि मैं ऐसे उच्च मार्ग से चलूँ जो समस्त जगत के लिये शुभदायक हो, संसार को सही दिशा दिखाने वाला हो, और समाज में न्याय, पवित्रता और करुणा को फैलाने वाला हो.
- deepo pragat mati gyan prakashpradeep karoshi: आत्मा में प्रकाशित विवेक, ज्ञान और बुद्धि का दीप जला कर मोहित-आकर्षण-वृष्टि आदि से परे स्पष्ट प्रकाश पैदा करना—यानी गहन ज्ञान और शांत विचार से मानसिक-चेतना का उभरना।
समझ का सार:
- यह श्रद्धा-भरा निर्देश है कि हम केवल बाहरी तप नहीं करें, बल्कि निर्ग्रन्थ (निर्गुण) तपस्या से अपनी आत्मा को शुद्ध करें।
- साथ ही हमें अपने ज्ञान-चेतना से संसार को मार्गदर्शित करना चाहिए, अर्थात नीतिपूर्ण आचरण और सन्मार्ग के प्रकाश से दूसरों की भलाई करना।
- अंत में जीव के भीतर उज्ज्वल ज्ञान-सम्पन्नता का दीपक जलाकर आत्म-प्रकाशन और वास्तविक समझ प्राप्त करनी है।
ध्यान दें:
- Digambar और Shwetambar परम्पराओं में तपस्या, ज्ञान और जगत-मार्ग के अर्थों में समान भाव रहते हैं, पर कभी-तक अनुभूतियों और शब्दावली में छोटे-मोटे भेद मिलते हैं। कुल मिलाकर उद्देश्य वही है: आत्म-त्याग, सत्य-मार्ग और ज्ञान का प्रकाश।
- यदि आप चाहें तो मैं इस प्रार्थना का पूरा शास्त्रीय पाठ (जैन śloka/स्तोत्र) और उसका शाब्दिक अर्थ Digambar–Shwetambar दोनों परम्पराओं के अनुसार दे दूँ।