Shayri on tapasya
Here are some Jain-inspired shayari couplets on tapasya (austerity) in simple Hindi:
- तपस्या तपते मन की ज्योति है, हर हिंसा से दूर प्रेम की रौशनी है।
- बिना अन्न-जल के नहीं, पर आत्मे को भोजन टै्रनिंग दे तपस्या, द्रष्टि शुद्ध रखे।
- तपस्या है शून्यता में भी एक पूर्णता, लालच-अहँकार को छोड़ो, पाछे न रहे कुछ बाकी।
- कठोर साधना नहीं, सरल समर्पण है Tapasya, भीतर की शांति बाहरी जग को दिखाती है।
- अहिंसा और सत्य की धारा में बहना, लोभ-मन का पंथ छोड़ना है तपस्या का फसल।
यदि चाहो, मैं इन में से किसी को और छोटा/लंबा बना दूँ, या एक विशेष शैली (कविता, शेर, घुमावदार शेर-सा) के अनुरूप ढाल दूँ।