Tapasya kavita in hindi
Tapasya Kavita (Hindi)
शांतिकुंभार मन का, तप है पथ प्रकाश, आत्म-निग्रह से बनती, सच्ची हमारी आस्था rahat। संयम की कलम से लिखे जाते कदम, इन्द्रियों पर विजय, सुकृत बनते हैं क्रम।
रात की चांदनी भी कहे, “धीरे चलो, धैर्य धरो”, हर प्रलोभन से बचके ही, जीवन को सरल करो। अहिंसा की राह पर चलना, दिल से गहरे लगना, जो भूले नहीं व्रत-व्रतियों को, वही जीवन संवारना।
तपस्या नहीं है दुख का रोना भरना, यह चेतना का दीप जलाकर, हर भ्रम को सहना। दिल में शांति बुनो, सांसों में संतुलन लो, जो असत्य से दूर रहे, वही आत्मा को मोहोLO (मोहित नहीं)।
ऊँचे आदर्शों का आचरण, छोटे-छोटे उपायों से, दिन-प्रतिदिन तप जारी रखना, यही सच्चा धर्म-सम्मान है। जिनकी तपस्या पवित्र, वे शिव-सत्य के निकट आते, धर्म-दीप जगे रहता, जीवन भर प्रकाशमय रहते।