Karmon ka uday aaya to adinath bhagwaan ko aahar ki prapti nahi huyi...where it is written
यह कथा निम्न Jain ग्रंथों में मिलती है:
- आदिनाथ (ऋषभदेव) के renunciation और 400 दिन के उपवास का विवरणHemachandra के Trishashti Shalakapurusha-Charitra में आता है; उस कथा के अनुसार पहली आहार-प्रप्ति Akshaya Tritiya के दिन होती है। इस उपाय को आदिनाथ-चरित्र/ आदिनाथ भगवान के Upsarg के रूप में भी उद्धृत किया गया है. JainKnowledge पर Upsarg/आहार-बंदन के बारे में लेख मौजूद हैं.
- Akshaya Tritiya के सचेतन आहार-दान के इतिहास के संदर्भ Ratnakaranda śrāvakācāra (Sallekhana अध्याय) और अन्य śrāvaka-चरित्रों में भी मिलता है, जहाँ आहार पाने की कथा और भूमिकाओं का उल्लेख होता है. JainKnowledge के Varshitap और आहार-दान से जुड़े पन्नों में इसी धारणात्मक क्रम को संक्षेप में स्पष्ट किया गया है.
संक्षेप arth (धार्मिक अर्थ):
- आदिनाथ ने renunciation के बाद जिस तरह भोजन-प مؤक अंत तक रोका, वह karma घटाने के लिए की जाने वाली तपस्या का भाग है; पहला आहार-प्राप्ति Akshaya Tritiya के दिन होती मानी जाती है। यह घटना Varshitap/ahara-dāna के बारे में पुरानी परंपराओं में महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। उपरोक्त ग्रंथों में इसी क्रम की पुष्टि मिलती है।