105 ka महत्व
105 का महत्व Jain धर्म में Sambhavnath (तीसरे तीर्थंकर) के संदर्भ से जुड़ा है।
- Sambhavnath के समय के Ganadhar (प्रधान शिष्य) कितने थे? परंपरा के अनुसार Sambhavnath के साथ 105 Ganadhar थे, जो उनके समावर्तन (समवसरण) के समय उनके प्रवचनों को सुने और समझाये थे। यह संख्या उनके समाज/शिक्षण की विशालता और शास्त्री ठहराव को दर्शाती है। कुछ विद्वानों/परंपराओं में Ganadhar की संख्या 102 भी मानी जाती है, इस कारण Digambar बनाम Śvetāmbara प्रभाव से आंकड़ों में भिन्नता मिलती है। इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि प्रत्येक परंपरा अपनी आचार-व्यवस्था के अनुसार संख्या बताती है।
- सरल शब्दों में: 105 Ganadhar का मतलब है कि Sambhavnath के साथ एक बड़े शिक्षण-समुदाय ने उनके उपदेशों को सुनकर स्वीकार किया और वही शिक्षा लोगों तक पहुंची।
नोट: अगर आप चाहें, मैं इस विषय पर Digambar और Śvetāmbara परंपराओं के बीच नंबरों की अलग-अलग विवरणों को आसान शब्दों में तुलना के साथ समझा सकता हूँ।