Muje ye bataye kaunsa karma responsible hota h jab kisi ki shadi nahi hori hoti h
संक्षेप में: शादी नहीं हो पाना किसी एक खास karma से नहीं जुड़ा है। यह कुछ मिलीजुली प्रक्रियाओं का परिणाम है—बीती karmas (जो पहले से फलीभूत हो चुके हैं) और अभी के karmas (जो आप आज कर रहे हैं) का संयुक्त असर।
- पूर्व-निर्धारण/फलीकरण वाला हिस्सा: कई बार किसी विशिष्ट विवाह का अवसर पहले के कर्मों के फलों के रूप में निर्धारित हो जाता है। इसे निसर्ग-करण (nisarga karma) कहा जा सकता है—यानी पिछले कर्मों का परिणाम अभी सामने आ रहा है।
- वर्तमान कर्म और आचार-व्यवहार: जो आप अभी कर रहे हैं, आपकी सोच और इरादे भी नए कर्म बनाते हैं, जो आगे की घटनाओं को प्रभावित करते हैं। इसलिए विवाह की स्थिति सिर्फ़ पहले के karma पर नहीं, बल्कि अब के कर्मों पर भी निर्भर होती है।
इस विषय पर Jain ज्ञान में संक्षेप में यही बताया गया है कि विवाह जैसे सांसारिक घटनाएँ पूर्व-निर्मित karmic प्रकृति से आ सकती हैं, साथ ही वर्तमान कर्म भी नई karma बनाते हैं। ( jainknowledge.com)