Raj aagna se daan dene wala koĥ ??
जैन धर्म में "राज आज्ञा" से दान देने वाले को "राजाज्ञा दाता" (राजा की आज्ञा से दान देने वाला) कहा जाता है। शास्त्रों में ऐसे दान को श्रेयस्कर (श्रेष्ठ) नहीं माना गया है। जैनागम के अनुसार, दान सच्चे भाव, स्वेच्छा और अहिंसा-भावना से दिया जाना चाहिए, न कि किसी के दबाव, आज्ञा या डर से। यदि कोई व्यक्ति राजा या किसी अन्य के आदेश या दबाव से दान देता है, तो उसका दान 'राजाज्ञा दान' कहलाता है, जो श्रेयस्कर दान नहीं है।
जैन धर्म में दान देने के चार प्रकार बताए गए हैं—
- भयरूप दान (भय से)
- लाभ की इच्छा से
- राजाज्ञा से
- श्रद्धा और भक्ति से (यह सर्वश्रेष्ठ है)
इसमें चौथा, श्रद्धा और भक्ति से दिया गया दान ही सबसे उत्तम और पुण्यदायी माना गया है।