12 देवलोकों में से श्रावक कितने देव लोक तक जा सकता है
जैन धर्म की लोक-कल्पना के अनुसार 12 देवलोक हैं, किन्तु श्रावक (householder) इन देवलोकों तक सीधे नहीं पहुँचते। पुण्य-धर्म से उनके पुण्य-फल बढ़ते रहते हैं और वे ऊँचे देवलोकों के भीतरवास कर सकते हैं, परन्तु पर्वतमाला-सम देवलोक तक पहुँचना और वहाँ स्थायित्व मिलना एक कठिन क्रम है जो आत्मा के स्पष्ट सिद्धियाँ (मोक्ष) तक ले जा सकता है। सामान्य तौर पर बड़े पुण्य मिलने पर श्रावक कुछ देवलोकों में प्रवेश कर सकते हैं, परंतु अंतिम मोक्ष और सिद्ध-लोक तक पहुँचना सिर्फ एक संयमी (तपस्वी) या सिद्ध की स्थिति के योग से संभव होता है।
ध्यान दें:
- देवलोकों के स्तरों के बारे में जैन सूत्रों में विभिन्न मतावलंब (дивांगर/श्वेताम्बर) के अनुसार सही व्याख्याएँ थोड़े भिन्न हो सकती हैं।
- श्रावक के लिए लक्ष्य व्यवहारिक है: सही श्रद्धा, द्वार-निष्ठा, तप, दान आदि द्वारा पुण्य बढ़ाकर अंततः मोक्ष को प्राप्त करना।
यदि आप चाहें, मैं इस विषय में Digambar और Shwetambar Traditions के अंतर को सरल~सार तरीक़े से भी स्पष्ट कर दूँ।