how much loggasa should we do daily im shewtambar
संस्कृत/पारम्परिक शब्द “loggasa” का श्वेतांबर परंपरा में सामान्य रूप से मानक पालन नहीं मिलता है। संभव है आप किसी एक विशिष्ट क्षेत्रीय शब्द या स्थानीय अभ्यास की बात कर रहे हों, पर प्रदान किए गए शब्द से स्पष्ट नहीं है कि वह कौन सा जाप/व्रत है।
श्वेतांबर परंपरा में रोज़मर्रा के प्रमुख संघटन निम्न हैं:
- सगुण/अनुसार समय में सामयिक (Samayik): हर दिन लगभग 48 मिनट का मानसिक-धार्मिक विनियोग, प्रायः तेरह अंगों के साथ ध्यान और पवित्र शास्त्रों का साधना।
- प्राकट/प्रतिक्रमण (Pratikraman): हर दिन या कुछ दिन में आत्म-चिंतन, पाप-समाधान, क्षमा-याचनाएँ आदि।
- अन्य संकल्प: पिंड-उपचार नहीं, बल्कि नित्य-व्रत, उपवास के छोटे-छोटे संकल्प (जैसे अन्न-त्याग) और प्रतिदिन के आरती/पूजा।
यदि आप किसी विशेष कठिन शब्द “loggasa” से किसी खास जाप/व्रत की बात कर रहे हों, कृपया उसे स्पष्ट रूप में लिख दें (उदा. किस पाठ/किस ग्रंथ से) ताकि मैं ठीक-ठीक विवरण दे सकूँ।