Shatrunjay ke do udhharo ke bichme 1 sagropam ka antar tha
जी हाँ, शत्रुंजय के दो उद्धारों के बीच एक सागरोपम (सागरोपम = 10^16 वर्ष) का अंतर था। जैन ग्रंथों के अनुसार, शत्रुंजय पर्वत का कुल 99 बार उद्धार (तीर्थंकरों द्वारा पवित्र किया जाना) हुआ है। प्रथम उद्धार ऋषभदेव भगवान (पहले तीर्थंकर) द्वारा और आखिरी (99वाँ) उद्धार महावीर स्वामी (24वें तीर्थंकर) द्वारा हुआ। हर दो उद्धारों के बीच एक सागरोपम का अंतर बताया गया है।
यह विवरण हमें जैन धर्म के शास्त्रों जैसे कि कल्पसूत्र, तीर्थमाला, शत्रुंजय महात्म्य आदि में मिलता है।