5 acchar name like darshana aachar
50
नीचे पाँच अहम आचार (महाव्रत) होते हैं, जिन्हें जैन धर्म में मुख्य नैतिक कर्म के तौर पर माना जाता है:
- अहिंसा (Ahimsa) – हिंसा नहीं करना, विचार, शब्द और कर्म तीनों में सभी जीवों के प्रति करुणा रखना।
- सत्य (Satya) – सत्य बोलना, पर हिंसा से harm न हो ऐसी सावधानी बरतना।
- अस्तीया (Asteya) – चोरी न करना; दूसरे के वस्तु-सम्पत्ति, समय, संसाधन का आदर करना।
- ब्रह्मचर्य (Brahmacharya) – विवाहितों के लिए सचाई से सम्बन्ध रखना; संन्यासियों के लिए पूर्ण ब्रह्मचर्य।
- परिग्रह-ha (Aparigraha) – वस्तुओं और आसक्तियों से दूरी बनाकर सरल जीवन जीना।
इन महाव्रतों के साथ lay follower (Shravak/Shravika) के लिए पांच छोटे व्रत (Anuvratas) भी होते हैं—इनमें अहिंसा, सत्य, अस्तीया, ब्रह्मचर्य औरaparigraha उन्हीं के अनुरूप कम कठोर रूप में पालन किये जाते हैं। साथ ही शिख्सा व्रत आदि дисцип्लीन व्रत भी जुड़ते हैं (जैसे समायिका आदि) ताकि दैनिक जीवन में सही आचार अपनाया जा सके। धर्म-संस्कार और संकल्प का यह ढांचा Digambar और Śvetāmbara दोनों में सामान्यतः एक जैसा होता है, केवल कथन/शब्दों में हल्की-सी भिन्नताएं हो सकती हैं।
एक संक्षिप्त संदर्भ: