5 aacar name
60
यहाँ पाँच आचार (महाव्रत) के नाम हैं:
- अहिंसा ( Ahimsa ) — हिंसा नहीं करना; जीते-जागते हर प्राणी की जीवना का सम्मान।
- सत्य ( Satya ) — सत्य बोलना; असत्य और धृतरहित बातें नहीं कहना।
- अचौर्य ( Achaurya / Asteya ) — चोरी नहीं करना; दूसरे के वस्तु, समय या विचारों का अनुचित लाभ नहीं लेना।
- ब्रह्मचर्य ( Brahmacharya ) — विवाहित जीव के लिए नैतिक प Swimming; शुद्ध और पवित्र जीवन।
- अपरिग्रह ( Aparigraha ) — अति-संग्रह से विरक्ति; अनावश्यक वस्तुओं और आसक्तियों से दूरी।
नोट:
- इन पाँचों को महाव्रत कहा जाता है और ये शुद्ध साधना के लिए मोक्षा मार्ग में लिया जाता है— Digambar और Shwetambar दोनों पर समान विचार। पदों का बारीक उल्लेख अक्सर आचार्य-परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, पर मूल अर्थ वही रहता है।
- वरिष्ठ Jain सूत्रों में इन आचारों का उद्देश्य अहंकार-मुक्त, करुणामय और संयमी जीवन अपनाना है।
अगर आप चाहें, मैं इन महाव्रतों के प्रत्येक के लिए संक्षिप्त धर्मार्थ विवरण भी दे सकता हूँ।