krodh ko kiski upma di gayi hai
कुष्ठ नहीं, Jain धर्म में कड़ोध (क Rodh) की upma बहुत जगह मिलती है। सामान्य रूप से कहा गया है कि कड़ोध एक अग्नि के समान है जो भीतर के शांति, धैर्य और नैतिक गुणों को जला देता है। इससे व्यक्ति का विवेक और शरीर-मन संयम नष्ट हो जाते हैं; इस कारण कड़ोध से बचना चाहिए ताकि आत्मा की शुद्धि औरuprakti बनी रहे।
ध्यान रहे कि अलग-अलग Digambar और Śvetāmbar ट्रडिशनों में कुछ शब्द-उपमाओं में भिन्नता हो सकती है, पर मूल संदेश यही है: कड़ोध से मुक्ति पाने के लिए नियंत्रण, तप, सदाचार और संयमता आवश्यक हैं।
यदि आप किसी खास ग्रंथ/सूत्र का नाम देते हैं, तो मैं उसी के अनुसार सही शब्द-उपमा और उसका अर्थ स्पष्ट कर दूँगा.