shri guru gautam samariye vanchit fal datar
ये पंक्ति Manglik (Manglik Stotra) का एक भाग है और विशेषकर कई जैन समुदायों में अन्त में जोड़ा जाता है. श्लोक के अनुसार:
- Shri Guru Gautam samariye – हे श्री गुरु गौतम समारिये (गौतम गुरु की चरणों में)
- vanchit fal datar – वांछित फल दातार (आप जो चाहें वही फल देते हैं)
Arth (मतलब): गुरु गौतम आपकी ईच्छित संकल्पित फलों को देकर कृपापूर्ण आशीर्वाद देते हैं. साधारण बोलचाल में इसका आशय है कि गुरु की कृपा से जिस काम कोiyoruz (उत्साह, शुभ फल, मोक्ष आदि) पूरा हो सकता है, गुरु उसे प्रदान करें. यह शुद्ध भक्ति और शुभकामना का प्रतीक है, न कि औचित्यविहीन वस्तुओं की कामना।
- यह भाग Manglik के अंत में कर्म-स्वरूप शुभ परिणामों की मांग का एक सामान्य क्रम है और शाखा-विशेष (Digambar/Shwetambar) के बावजूद उसका सार समान ही रहता है.
जो पाठ-संदर्भ JainKnowledge से मिलते हैं:
यदि आप चाहें तो मैं इस Manglik पाठ की पूरी पंक्ति-वार क्रमिका (Navkar+Manglik आदि) भी सरल हिन्दी-अनुवाद के साथ दे दूँ.