9 month tak aahar nahi mila tha
आपका प्रश्न "9 महीने तक आहार नहीं मिला था" स्पष्ट नहीं है। यदि आप जैन धर्म के संदर्भ में यह पूछ रहे हैं, तो कृपया स्पष्ट करें कि किस प्रसंग या किस व्यक्ति/घटना की बात कर रहे हैं।
जैन धर्म में तपस्या, उपवास (फास्टिंग) और संयम का बड़ा महत्व है। कई साधु-साध्वियां और भक्त लंबे समय तक उपवास करते हैं, लेकिन 9 महीने तक बिना आहार के रहना मानव शरीर के लिए संभव नहीं है। जैन धर्म के अनुसार, सबसे दीर्घकालिक उपवास 'संलेखना' कहलाता है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे आहार और जल का त्याग करता है, परंतु यह भी निश्चित अवधि तक ही होता है, और इसमें भी व्यक्ति का स्वास्थ्य और क्षमता देखी जाती है।
यदि आप माता के गर्भ में बालक (जीव) की बात कर रहे हैं, तो जैन धर्म के अनुसार, जन्म से पहले बच्चा गर्भ में रहता है और वहां आहार नहीं लेता जैसा बाहर के जीव लेते हैं—इसलिए कभी-कभी कहा जाता है कि जीव ने गर्भ में 9 महीने बिना आहार के बिताए। यह एक धार्मिक दृष्टिकोण और दृष्टांत है, जिससे जीवन के प्रारंभ में ही जीव के तप और सहनशीलता को बताया जाता है।
अगर आप किसी अन्य प्रसंग के बारे में पूछना चाहते हैं, तो कृपया स्पष्ट करें।