जैन ब्रह्माण्ड kya hai
जैन ब्रह्माण्ड (Loka) एक अविनाशी, अनंत और निरंतरचलनशील वस्तु मानी जाती है. यह किसी देवता ने नहीं बनाया है और न किसी समय उसका प्रारंभ या अंत होता है; वह स्व-स्थिर है. ब्रह्माण्ड को जैन दार्शनिक शब्दों में छह dravya ( substances) और तीन क्षेत्रों में वर्णित किया जाता है.
मुख्य बिंदु:
- יס six dravya: जीव (Jiva, जीवात्मा), Pudgala (पदार्थ), Dharma (चालका तत्व), Adharma (रुकावट-तत्व), Akasha (आकाश/स्थान) और Kala (काल, समय). जीव और अजैव पदार्थ मिलकर Lokko को बनाते हैं.
- Lok का विभाजन तीन भागों में होता है:
- ब्रह्माण्ड अनेकों लोकों से मिलकर बना है और अनंत काल तक चलता है; इनमें देवताओं से लेकर मनुष्यों तक सब कर्मों के अनुसार पुनर्जन्म होते हैं.
- Digambar और Shwetambar के भीतर समुद्रम के विवरणों में कुछ ग्रंथीय स्पष्टताएँ भिन्न हो सकती हैं, पर मौलिक विचार—ब्रह्माण्ड अनंत, निर्मित नहीं, और लोक तीनों क्षेत्रों में विभाजित हैं—अक्सर एक ही धुरी पर टिका रहता है.
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