Pratikraman mein sthapnacharya
Pratikraman में sthapnacharya के बारे में सामान्य रूप से यही माना जाता है:
- Pratikraman का मुख्य कर्तव्य स्वयं पाठक/श्रावक द्वारा किया जाता है, न कि किसी विशेष sthapanacharya (पंडित/आचार्य) द्वारा. घर में Pratikraman की पूर्व-तैयारी और व्यवस्थाएं स्वयं व्यक्ति करता है—जैसे Navkar manu mantra का पाठ, samayik-vastra, स्थान का चयन, आदि. Digambar बनाम Shwetambar दोनों धाराओं में यह सामान्य prakriya है कि Pratikraman का संचालन व्यक्ति/गृहस्थ के द्वारा होता है, न कि किसी खास आचार्य द्वारा अलग से—यहीं से इसकी सरलता और रोजमर्रा में करने योग्य होने की बातें निकलती हैं.
- कुछ स्थानों पर “sthapna” शब्द का प्रयोग Pratikraman के आरम्भ में व्यवस्था (स्थापना) के लिए होता है, पर इसका मतलब किसी विशिष्ट पुजारी के स्थापनाप्रधान कार्य से अधिकतर नहीं माना जाता; यह साधारण तैयारी है जो गृहस्थ अथवा साधु/साध्वी अपने-अपने तरीकों से करते हैं.
संक्षेप में: Pratikraman में sthapnacharya एक विशेष पद नहीं है; इसे आरम्भिक व्यवस्था और स्थान-तैयारी के संदर्भ में समझा जा सकता है, और यह Digambar/Shwetambar दोनों में समान रूप से household-level आचार के रूप में माना जाता है.