मिथ्यात्व के कितने प्रकार हैं?
मिथ्यात्व (mithyatva) का अर्थ Jain धर्म में गलत/असत्य विश्वास है। इसे बहुधा नीचे के प्रकारों में वर्गित किया गया है, हालांकि सही संख्या और नाम Digambar तथा Shwetambar पर निर्भर हो सकते हैं और ग्रंथों के अनुसार भिन्न-भिन्न सूत्रों में भिन्न उपवर्ग भी मिलते हैं।
- आत्म (आत्मा) के बारे में गलत विश्वास: स्वयं के स्वरूप, अवस्थाओं या कर्मों के बारे में गलत धारणाएँ।
- पदार्थों/द्रव्य के बारे में गलत विश्वास: द्रव्य, क्षेत्र, समय आदि के स्वरूप या उनके वास्तविक गुणों के बारे में गलत समझ।
- जगत के विषय में गलत धारणा: संसार की प्रकृति, परिवर्तन या कारण-परिणाम के संबंध में अशुद्ध धारणाएँ।
- व्यवहारिक मिथ्या: गलत दावा, गलत ज्ञान पर आधारित भाषण या बात-चित में मिथ्या का प्रदर्शन।
- कर्म और मोक्ष के मार्ग के बारे में गलत धारणाएँ: मोक्ष, निर्वाण या Jain साधनाओं हेतु आवश्यक शुद्ध मार्ग के प्रति गलत विश्वास।
नोट:
- मिथ्यात्व के प्रकारों की सटीक गिनती साधन-शाखाओं (Digambar बनाम Shwetambar) के अनुसार अलग-अलग पुस्तक-वर्गों में अलग-अलग मिलती है। इसलिए उपरोक्त वर्गीकरण सामान्य विचार के रूप में प्रस्तुत है और विशेष शास्त्रानुसार भिन्न श्रेणियाँ मिल सकती हैं।
यदि आप चाहें, मैं Digambar या Shwetambar पर आधारित किसी विशिष्ट पाठ या श्लोक के अनुसार मिथ्यात्व के अपने-अपने प्रकारों को अधिक स्पष्ट और उद्धृत स्वरूप में बता सकता हूँ।