Navkarshi nahi aaye tau kausa pachkan lana chahiye
जैन धर्म में "नवकारशी" का अर्थ है – सूर्योदय के बाद पहली बार भोजन या जल ग्रहण करना। अगर आप किसी कारणवश नवकारशी के समय भोजन या जल नहीं ले पाए हैं, तो आपको इसका प्रायश्चित स्वरूप "पचकान" (पश्चात्ताप हेतु संकल्प) लेना चाहिए।
ऐसी स्थिति में कौन सा पचकान लें?
यदि नवकारशी का समय निकल गया है, तो आप "पुनः नवकारशी का पचकान" या "अपराध पचकान" ले सकते हैं। इसमें आप भगवान से क्षमा मांगते हैं और संकल्प करते हैं कि अगली बार समय का पूरा ध्यान रखेंगे। आप साधारण शब्दों में निम्न प्रकार से पचकान ले सकते हैं:
पचकान (प्रतिज्ञा): "हे अरिहंत प्रभु! आज मेरी नवकारशी छूट गई है। यह मेरा अपराध हुआ। मैं इसके लिए क्षमा चाहता/चाहती हूँ। मैं संकल्प करता/करती हूँ कि भविष्य में नवकारशी का पूरा ध्यान रखूँगा/रखूँगी।"
अथवा: "आज मेरी नवकारशी छूट गई, इसके लिए मैं भगवान से क्षमा माँगता/माँगती हूँ और आज के लिए एक समय का उपवास या एकासना करूँगा/करूँगी।"
नोट:
- आप अपने उपाध्याय, साधु-साध्वी या ज्ञानीजनों से पूछकर अपनी परिस्थिति अनुसार विशेष पचकान भी ले सकते हैं।
- पचकान लेने के बाद उस दिन नियम का पालन करें और मन में प्रायश्चित बनाए रखें।
सारांश: नवकारशी नहीं आई तो भगवान से क्षमा मांगकर पचकान लें और उस दिन संयम का पालन करें।