जम्बूद्वीप रचना का विवरण
जम्बूद्वीप (Jambudvipa) जैन Cosmology का मुख्य महाद्वीप है। इसे संसार की राजधानी, กंभीर रचना और मोक्ष मार्ग के लिए महत्त्वपूर्ण मानते हैं। नीचे सरल शब्दों में विवरण है:
- हर महाद्वीप के बीच में मेरु पर्वत (Mount Meru) स्थित है; मेरु ही ब्रह्मांड का केंद्रीय axis माना जाता है।
- जम्बूद्वीप के चारों ओर जलमीन (समुद्र/जल-रेखा) और फिर दूसरा महाद्वीप-खंड चलता है; इस क्रम को जैन साहित्य में एक स्थापित मॉडल के तौर पर दर्शाया गया है।
- जम्बूद्वीप के भीतर सात क्षेत्र माने जाते हैं:
- भरत क्षेत्र
- हिमवत क्षेत्र
- हैमवत क्षेत्र
- विदेह क्षेत्र
- रम्यक क्षेत्र
- हैरण्यवत क्षेत्र
- ऐरावत क्षेत्र
- इन क्षेत्रों के बीच पहाड़/पर्वत जैसे ज्यामितीय विभाजन और सप्त-उप-विभाजन भी बताये जाते हैं।
- चारों ओर की जल-रेखाएं (समुद्र-आयाम)
- जम्बूद्वीप को घेरे हुए समुद्र/जलधाराएं: Lavaṇa-samudra (लावण समुद्र) आदि।
- इसके बाहर एक और महाद्वीप-खंड (often वर्णन में Dhātakīkhaṇḍa) और उनके चारों ओर जल-रेखा शामिल होती है।
- अंत में Puṣkara क्षेत्र के आंतरिक भाग मौजूद माना जाता है।
- मेरु पर्वत जम्बूद्वीप के केंद्र में ऊँचा मंजर है; इससे ऊपर उर्ध्वलोक (देवलोक) और नीचे अधःलोक (नरक-लोक) के भाग बताए जाते हैं।
- जम्बूद्वीप इन cosmological कल्पनाओं का मूल नमूना है, जिससे अन्य द्वीप-खंड (द्वीप) उसकी नकल के रूप में बनते हैं—यानी यह एक केंद्रीय मॉडल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
भिन्न परंपराओं के मत
- Digambar और Shwetambar दोनों ही इस कल्पना को मानते हैं, पर कुछ विवरणों में स्थान-नाम, क्षेत्र-संरचना या मेरु-परिक्रमा जैसी बातों में परस्पर भिन्नताएं मिलती हैं। इन भिन्नताओं को संपूर्णता से समझना 위해 श्रद्धेय ग्रंथों और विद्यालयों के टिप्पणी-ग्रंथों को देखना चाहिए।
आप इस विषय पर अधिक स्पष्ट और संरचित रूप से पाठ-उद्धरण सहित पढ़ना चाहें, तो आप नीचे दी गई JainKnowledge की पन्नों में से Jambudweep–सम्बन्धी लेख देख सकते हैं:
- Jambudweep Complex (JainKnowledge)
यदि आप चाहें, मैं इस विषय के लिए Digambar और Shwetambar पर केंद्रित छोटे-छोटे अंतर भी सरल भाषा में बताकर स्पष्ट कर दूँ।