अरिहंत परमेष्ठि और सिद्ध परमेष्ठि में क्या अंतर होता है
संक्षेप में:
- Arihant परमेष्ठि: वह ऋषि जैसे आत्मा जिसने अहिंसा, लोभ, क्रोध आदि सभी आंतरिक क्लेशों को जीत लिया है और kevala ज्नान प्राप्त कर लिया है, पर अभी शरीर में जीवित रहता है। वे ज्ञान-प्रकाश से संसार को देखाते हैं और दूसरों को सही मार्ग दिखाते हैं; उनके शरीर का अस्तित्व अभी बना रहता है।
- Siddha परमेष्ठि: वह पूर्ण मोक्ष प्राप्त आत्मा है—किसी भी बंधन, जन्म-जनमांतर के चक्र से मुक्त। Siddha का शरीर नहीं रहता; वे सिद्धलोक में स्थित रहते हैं और अब उन्हें पुनः जन्म नहीं लेना पड़ता।
कुछ स्पष्ट बातें:
- Arihant और Siddha के बीच असली फर्क यही है: Arihant अभी भी शरीरधारी है और मार्गदर्शन देते हैं; Siddha शरीर-मुक्त हो चुके होते हैं और स्थिर मोक्ष-सिद्धात्मा माने जाते हैं।
- दोनों ही Digambar और Shwetambar परंपराओं में मूल बात समान है, पर कुछ सूक्ष्म विवेचनाओं, पूजा-रीतिाओं और व्यक्त व्याख्या में मतभेद पायते हैं। दोनों धड़ों में मोक्ष की प्रकृति और सिद्ध-लोक की स्थिति पर अलग-अलग विवरण मिलते हैं, पर सार यही रहता है कि Siddha निर्गुण मोक्ष प्राप्त आत्मा है और Arihant अभी साधना-पूर्वक मार्गदर्शक है।
अगर आप चाहें, तो मैं इन दोनों पदों के संदर्भ में Digambar और Shwetambar परंपराओं के विशिष्ट व्याख्या-points भी सरल भाषा में बता दूँ।