तापस कमठ मरकर किस जाति का सांप हुआ
जैन धर्म के अनुसार, तापस कमठ पूर्व जन्म में एक तापस (तपस्वी) था। जब उसने मरकर पुनर्जन्म लिया, तो वह साँप (नाग) के रूप में जन्मा। जैन ग्रंथों के अनुसार, कमठ ने अपनी द्वेष भावना और क्रोध के कारण साँप योनि (नाग) में जन्म लिया था।
जहाँ तक जाति का प्रश्न है, जैन परंपरा में साँप के रूप में उसकी जाति 'नाग' मानी जाती है। विशेषतः, कमठ “चण्डकौशिक नाग” के नाम से प्रसिद्ध है। यह कथा भगवान श्री महावीर स्वामी के जीवन प्रसंगों में आती है, जहाँ चण्डकौशिक नाग (पूर्व जन्म में कमठ) ने महावीर स्वामी को डँस लिया था।
इस प्रकार, तापस कमठ मरकर 'नाग' जाति का साँप हुआ।