निरgranth गुरुओं द्वारा उपदेश को क्या कहते हैं
निरगंन्थ गुरुओं के उपदेश का मूल संदेश लगभग वही रहता है जो जैन धर्म के तीन स्तम्भों ( ratnatraya ) में स्थिर है:
-ratnatraya: सही विश्वास (Samyak Darshan), सही ज्ञान (Samyak Jnana), सही आचरण (Samyak Charitra) — ये त्रिनेत्री मोक्ष की राह बनाते हैं। गुरु समूह इन त्रुटियों को दूर करके इन तीनों को विकसित करने की शिक्षा देते हैं.
-आचार-स्वभाव: मुनि-गुरु उपदेशों के साथ अहिंसा, सत्ya, अण्ँचर (अपरिग्रह), ब्रह्मचर्य आदि पाँच महाव्रतों (घर वालों के लिए) और महाव्रतों (सन्न्यासियों के लिए) को दृढ़ता से स्थापित करते हैं. ये विद्युत् vows जीवन के हर क्षेत्र में सही और संयमित जीवन की प्रेरणा देते हैं.
-अनेकान्तवाद और सायावद (Syadvada): गुरु उपदेशों में अनेक-दृष्टिकोण के सत्य को मानना और तत्त्वों को एकतरफा न समझना सिखाया जाता है; इससे संयम, सहिष्णुता और ज्ञान में गहराई आती है.
- Digambar बनाम Shvetambar में भिन्नता: मूल सिद्धान्त एक ही हैं, पर मोनastic नियमों, स्क्रिप्चर्स के चयन और कुछ कर्म-नीतियों के व्याख्यान में दोनों के बीच विन्यास भिन्न हो सकता है। गुरु उपदेशों की दिशा-नीति सामान्य रूप से Ratnatraya और चरित्र-आचरण के अनुरूप ही रहती है.
यदि आप चाहें, तो मैं किसी खास सूत्र या उपदेश का संक्षेप में अर्थ (arth) और मूल पाठ से उसका संदर्भ दे दूँगा।