Shtrunnay par nandiswar deep on navtuk kisne nirman kiya
शास्त्रों के अनुसार, नंदीश्वर द्वीप पर नवपद (नवग्रह – नवतुक) शत्रुंजय पर्वत की प्रतिमा या वहाँ की रचना का प्रत्यक्ष रूप से किसी मनुष्य द्वारा निर्माण नहीं किया गया है। जैन धर्म के अनुसार नंदीश्वर द्वीप एक दिव्य, अलौकिक स्थान है, जो इस पृथ्वी लोक से भिन्न है। वहाँ पर चौबीस तीर्थंकरों के चैत्यों का, मंदिरों का स्वयंभू (स्वतः प्रकटित) रूप से निर्माण हुआ है।
जैन आगमों के अनुसार, मनुष्य लोक में नंदीश्वर द्वीप की पूजा, आराधना और वहाँ के चौबीस चैत्यों का भक्तिपूर्वक स्मरण करने के लिए, उसके प्रतीक स्वरूप शत्रुंजय पर्वत, सम्मेद शिखर, गिरनार आदि तीर्थों पर अथवा मंदिरों में नंदीश्वर द्वीप के प्रतिरूप (model/replica) का निर्माण किया जाता है।
इस प्रकार, नंदीश्वर द्वीप पर नवतुक के निर्माणकर्ता कोई मनुष्य नहीं, बल्कि यह दिव्य रचना स्वयं सिद्ध है, और उसकी प्रतिकृति का निर्माण मुनि, श्रावक या श्रद्धालु भक्तों द्वारा कराया जाता है।
सारांश: नंदीश्वर द्वीप पर नवतुक (नवपद) का निर्माण किसी मनुष्य ने नहीं किया, वह दिव्य और स्वयंभू है। उसकी प्रतिकृति का निर्माण पृथ्वी लोक में श्रद्धालु जैन भक्तों द्वारा कराया जाता है।