Jarchandra surini kitne warso tk aaymbil tap kiye the
आचार्य श्री जिनचंद्रसूरिजी महाराज (जिन्हें जर्चंद्रसूरी भी कहा जाता है) के बारे में प्रसिद्ध है कि उन्होंने अपने जीवन में लगभग 12 वर्षों तक लगातार आयंबिल तप किया था। आयंबिल तप जैन धर्म में एक अत्यंत कठिन तपस्या मानी जाती है, जिसमें साधक केवल एक बार उबला हुआ सादा भोजन, बिना नमक, तेल, घी आदि के, एक निश्चित समय पर ग्रहण करता है।
जर्चंद्रसूरीजी ने अपने तप, साधना और धार्मिक नेतृत्व के कारण जैन समाज में अत्यंत आदर और श्रद्धा प्राप्त की थी।