Siddhachakrta ji ke kitne bhed he
सिद्धचक्र यंत्र या सिद्धचक्र पूजा जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 'सिद्धचक्र' के मुख्यतः दो भेद माने गए हैं:
- दिगम्बर परंपरा में — सिद्धचक्र का उल्लेख अपेक्षाकृत कम है, किंतु वहाँ भी इसका प्रयोग होता है।
- श्वेताम्बर परंपरा में — सिद्धचक्र पूजा और यंत्र का विशेष महत्व है। श्वेताम्बर सम्प्रदाय में सिद्धचक्र के दो प्रमुख भेद माने जाते हैं:
- नवपद सिद्धचक्र: इसमें नौ पद (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र, और सम्यक् तप) सम्मिलित होते हैं। - बारहपद सिद्धचक्र: इसमें नवपद के साथ तीन और पद (दर्शन, ज्ञान, चारित्र) मिलाकर कुल बारह पद होते हैं।
इसके अतिरिक्त, कहीं-कहीं पर सिद्धचक्र के और भी भेद या रूपों का उल्लेख मिलता है, लेकिन सामान्यतः नवपद और बारहपद सिद्धचक्र के ही भेद प्रमुख रूप से माने जाते हैं।
सारांश: सिद्धचक्र के मुख्यतः दो भेद — नवपद सिद्धचक्र और बारहपद सिद्धचक्र — माने जाते हैं।