Shravane gotra haikya
“Shravane” नाम से कोई शास्त्रीय / सार्वत्रिक जैन gotra नहीं मिलता।
जैन धर्म में दो बातों को अलग‑अलग समझना ज़रूरी है:
- आत्मिक “गोत््र कर्म” (Gotra Karma)
- यह 8 कर्मों में से एक है, जो ऊँच‑नीच मान‑अपमान से सम्बंधित है। - यह सूक्ष्म कर्म है, जन्म से पहले ही बँध जाता है – इसका “सुरनेम / कुल / जाति” से सीधा सम्बन्ध नहीं है।
- सामाजिक “gotra / surname / kul”
- जैसे किसी‑किसी समाज में कश्यप, गौतम, आदि बोलते हैं – ये बस परिवार/वंश की पहचान हैं। - जैन आगम या मूल ग्रंथों में ऐसा कोई नियम नहीं कि हर श्रावक का कोई निश्चित gotra होना ही चाहिए। - अलग‑अलग क्षेत्र और समाज अपने‑अपने हिसाब से gotra या kul का नाम रखते हैं – यह धार्मिक से ज़्यादा सामाजिक प्रथा है।
इसलिए, अगर आपके परिवार या समाज में “Shravane” को gotra कहा जाता है, तो वह स्थानीय/परिवारिक पहचान है, न कि शास्त्रीय रूप से निर्धारित जैन gotra। धर्म की दृष्टि से आपके लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण है – सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र और अहिंसा–सैयम का पालन, न कि सामाजिक gotra।