ष्ट द्रव्य का स्वरूप
षट्-द्रव्य (छः द्रव्य) जैन दर्शन का बहुत मूल विषय है। “सारे लोक में जो भी है” वह इन्हीं 6 द्रव्यों से बना है। संक्षेप और सरल रूप में:
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1. जीव द्रव्य (Jiva – आत्मा)
- चेतन (Conscious) है – जानने‑देखने की शक्ति वाला।
- अनादि‑अनंत, नष्ट नहीं होता, केवल शरीर बदलता है।
- एक इन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय, नर‑नारी‑तिर्यंच, देव‑नारकी – सब जीव द्रव्य के ही रूप हैं।
- मोक्ष पाने योग्य द्रव्य – बन्ध भी जीव को है, मुक्त भी वही होता है।
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2. पुद्गल द्रव्य (Pudgala – पदार्थ/मेटर)
- जो रूप, रस, गन्ध, स्पर्श वाला हो – वह पुद्गल है।
- शरीर, जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि, अणु‑परमाणु, शरीर के कण, बोल, श्वास – सब पुद्गल हैं।
- कर्म-वर्गणा (कर्मकण) भी पुद्गल ही हैं, जो आत्मा से बँध कर कर्म बनते हैं।
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3. धर्म द्रव्य (Dharma – गति का माध्यम)
- अपने आप चलाता नहीं, “चलने का माध्यम” मात्र है।
- जैसे जल तैरने का माध्यम है, वैसा ही धर्म द्रव्य, जीव और पुद्गल की गति (चलने) का सार्वत्रिक माध्यम है।
- पूरे लोकाकाश में व्याप्त है, आलोक के बाहर नहीं।
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4. अधर्म द्रव्य (Adharma – विश्राम का माध्यम)
- अपने आप रोकता नहीं, “रुकने/विश्राम का माध्यम” है।
- जैसे छाया रुकने का सहारा बनती है, वैसे ही अधर्म द्रव्य, जीव‑पुद्गल के विश्राम का माध्यम है।
- यह भी पूरे लोकाकाश में है, आलोक के बाहर नहीं।
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5. आकाश द्रव्य (Akasha – स्थान/स्पेस)
- जिसमें सभी द्रव्य समा सकें – वह आकाश द्रव्य है।
- दो भाग माने:
- सिद्ध परमात्मा लोकाकाश के ऊपरवाले भाग में रहते हैं (सिद्धशिला क्षेत्र में)।
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6. काल द्रव्य (Kala – समय)
- परिवर्तन का कारण नहीं, परिवर्तन का “मापने वाला साधन/सहकारी” है।
- बिना काल के “पहले‑बाद में, पुराना‑नया” कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
- समय के अनन्त अनन्त क्षण (समय-पर्याय) होते हैं।
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कुछ विशेष बातें
- सभी 6 द्रव्य अनादि‑अनंत, अविनाशी हैं – इनका कभी निर्माण या नाश नहीं होता।
- हर द्रव्य में उसके नित्य गुण (जो कभी नहीं बदलते) और अनित्य पर्याय (जो हर क्षण बदलते हैं) रहते हैं।
- जैन दर्शन में इन्हीं 6 द्रव्यों की सही पहचान को सम्यक् दृष्टि/सम्यक् ज्ञान के लिये बहुत आवश्यक माना गया है।
- दिगम्बर और श्वेताम्बर – दोनों परम्पराओं में ये ही छह द्रव्य माने जाते हैं; मूल सूची में कोई भेद नहीं, केवल सूक्ष्म व्याख्या में थोड़े भेद मिलते हैं।
यदि आप चाहें तो अगली बार मैं एक‑एक द्रव्य के गुण (समान्य‑विशेष गुण) भी बहुत सरल भाषा में बता सकता/सकती हूँ।